चौधरी की डीई समाप्त, फिर भी दो अफसर फंसे प्रशासनिक गलियारा 

सीताराम ठाकुर राज्य सरकार ने अपर सचिव से सचिव के पद पर प्रमोशन देने डीई के चलते अनुराग चौधरी को सचिव के पद पर प्रमोट नहीं किया गया था, जबकि उनके बैच के सभी अधिकारी सचिव बन चुके हैं। खासकर सीएस ने इस मामले में चौधरी को क्लीनचिट देने के लिए दो-दो जांच करार्इं। पहले एक प्रमुख सचिव ने जांच रिपोर्ट में उन्हें क्लीनचिट दे दी, इससे सीएस संतुष्ट नहीं हुए तो फिर एक एसीएस से जांच कराई गई और एसीएस ने भी अपनी रिपोर्ट में इन्हें क्लीनचिट तो दे दी है, लेकिन डीई समाप्त होने के बाद भी प्रमोशन के आदेश अभी तक नहीं हुए हैं। ऐसे ही जमीन से जुडेÞ दो अलग-अलग मामलों में आईएएस अधिकारी ऋषि गर्ग और तरुण भटनागर के खिलाफ भी डीई के चलते अपर सचिव के पद पर प्रमोशन नहीं मिल सका है। इन दोनों अधिकारियों का लिफाफा बंद कर दिया है, जो अगली डीपीसी में खोला जाएगा। उधर, जमीन से जुडे एक घोटाले में सतना कलेक्टर रहे एक अधिकारी को भी क्लीनचिट नहीं मिल सकी हैं। वैसे सरकार इनके कामकाज से खुश है और जल्द विभागीय जांच समाप्त होने की संभावना है। 

आईएस से विवाद, फिर भी संकट बरकरार 

एक विभाग के प्रमुख सचिव का काफी समय से विभाग में ही पदस्थ एक महिला आईएएस अपर सचिव से विवाद चल रहा था। महिला आईएएस को हटाने के लिए उन्होंने कई बार उच्च स्तर पर गुहार भी लगाई। सरकार ने बाद में महिला आईएएस का ट्रांसफर कर उसी पीएस के अधीन संचालित विभाग में संचालक और एमडी पदस्थ कर दिया है। पहले से ही दिक्कतों से जू­ा रहे पीएस से एक अधिकारी ने जब चर्चा करते हुए ‘पूछा-आपको अब तो राहत मिल गई होंगी, इस पर प्रमुख सचिव ने कहा-पहले महिला अफसर ने मेरा हाथ पकड़ रखा था और अब गले की फांस बन गई हैं’। यानि गला पकड़ लिया है। वैसे उक्त महिला आईएएस को विभाग से हटवाने के लिए छोटे से लेकर बडेÞ अधिकारी ने भी मोर्चा खोल रखा था, लेकिन अब सरकार ने महिला आईएएस को भारत सरकार से जुडेÞ काम देखने और फंड लाने की जिम्मेदारी सौंपकर विभाग को सुधारने का काम दे दिया है। हालांकि उक्त महिला आईएएस की पटरी विभाग के कमिश्नर से भी नहीं बैठ रही थी? 

बडे साहब को छोटी और पीए को बड़ी गाड़ी का सुख 

मप्र के प्रशासनिक मुखिया बडेÞ साहब स्वयं के इस्तेमाल में छोटी गाड़ी का उपयोग करते हैं, लेकिन उनके निज सचिव को घर से मंत्रालय लाने-ले जाने के लिए इनोवा जैसी बड़ी गाड़ी लगा रखी है। रोज निज सचिव को घर से मंत्रालय लाने और घर छोड़ने का काम सरकारी इनोवा वाहन से किया जाता है। इन्हें मिल रही सुख-सुविधा के कारण अन्य कर्मचारी हजम नहीं कर पा रहे है। वैसे बडेÞ साहब के एक डिप्टी सेकेट्ररी को भी बड़ी गाड़ी मिली हुई है, लेकिन इनके बारे में चर्चा है कि ये सार्वजनिक स्थान पर स्मोकिंग करते हैं? सीधी भर्ती के आईएएस होने के कारण प्रमोटी अफसरों से इनका व्यवहार भी ठीक नहीं है। ये केवल सीधी भर्ती के आईएएस अफसरों से ही अपने संबंध बनाते हैं, जिसकी भी चर्चा मंत्रालय में खूब हो रही है। वैसे इन्हें जल्द इन्हें कलेक्टरी मिलने वाली  है, लेकिन इनके व्यवहार से नहीं लगता है कि ये जिले में कलेक्टरी संभाल पांएगे और ‘गुरु’ होने के कारण जनप्रतिनिधियों से रिश्ते अच्छे बना पाएंगे, क्योंकि जिले में काफी विवाद होते हैं, जिसके कारण कई बार जनप्रतिनिधियों की नाराजगी का शिकार कलेक्टरों को होना पड़ता है? 

पहले हुए सस्पेंड, अब संवैधानिक पद पर 

उज्जैन में पदस्थ रहे एक न्यायिक सेवा के अधिकारी को अच्छे काम करने की वजह से मप्र हाईकोर्ट ने इन्हें सस्पेंड कर दिया था। इन्हें सस्पेंड करने के पीछे इनके द्वारा की जाने वाली गुटबाजी थी, लेकिन बाद में ये बहाल भी हो गए और जिस अधिकारी से इनका विवाद हुआ था, उनके पीछे-पीछे यह भी प्रमुख सचिव बना दिए गए। पीएस रहे दोनों न्यायिक सेवा के रिटायर्ड अधिकारी एक संवैधानिक संस्था में जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। एक अधिकारी प्रमुख के तौर पर काम कर रहे हैं तो दूसरे अधिकारी उपप्रमुख के रूप में काम करने का मजबूर हैं। वैसे इनकी नियुक्ति के मामले में नेता प्रतिपक्ष ने आपत्ति उठाई थी, लेकिन सरकार ने अपनी मनमर्जी से बहुमत के आधार पर निर्णय लेते हुए दोनों ही अधिकारियों को एक ही विभाग में पदस्थ कर दिया है। अब चर्चा ये है कि इन दोनों रिटायर्ड अधिकारियों की संवैधानिक संस्था को चलाने के लिए पटरी बैठ रही है या नहीं? वैसे दोनों ही बेफिक्र काम करने में मशगूल हैं। जिसकी चर्चा मंत्रालय में भी सुनाई देने लगी है। 

जीएडी की गलती की सजा प्रमोशन में 

मंत्रालय में अनुभाग अधिकारी और स्टाफ आॅफिसर से अवर सचिव के होने वाले प्रमोशन में डीपीसी गलत ढंग से करने की वजह से प्रमोशन के आदेश अभी तक जारी नहीं हो सके हैं। खासकर सहायक अनुभाग अधिकारी से अनुभाग अधिकारी और अनुभाग अधिकारी से अवर सचिव के मंत्रालय में 81 पद स्वीकृत हैं। इनमें से 24 पद राप्रसे के अधिकारियों के लिए आरक्षित है और प्रमोशन से भरे जाने वाले 57 पद हैं। इन पदों पर प्रमोशन देने के लिए जीएडी कार्मिक ने पिछले दिनों डीपीसी भी बुलाई, लेकिन कार्यवाही विवरण गलत ढंग से बनाने की वजह से मंत्रालय में सालों से प्रमोशन की बाट जोह रखे अधिकारियों को अवर सचिव नहीं बनाया जा सका। अब कर्मचारी ये खुसर-फुसर करने लगे हैं कि उन्हें बड़ी मुश्किल से तो प्रमोशन का लाभ मिलने वाला था, लेकिन जीएडी कार्मिक के अधिकारियों की गलती की सजा उन्हें मिलने जा रही है। वैसे डीपीसी के बाद इनके आदेश ही जारी होने थे, लेकिन बाद में दो डीपीसी करनी पड़ी। जिसकी चर्चा मंत्रालय में सुनाई दे रही हैं।